Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps May 12, 2024 रहे अजाने दांव पेंच से कर न सके तिकड़म।इसीलिए तो रंगमंच तक पहुंच न पाए हम ।हम सकुचाए बता न पाए उन्हें व्यथा अपनीफिर किसकी थी फुरसत सुनता कौन कथा अपनीसब अपनी उलझन में उलझे सब के अपने गम।। Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
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