चलो मान लेते हैं

तुमने नहीं जलाया उसे

उसने ही छिड़का ख़ुद पर पेट्रोल

और कर दिया स्वयं को आग के हवाले

बिलकुल उसी तरह जैसे

उसके पिता ने सौंपा था 

तुम्हारे हाथ में उसका हाथ

और सौंप दिया था अपना सर्वस्व

अपनी आंखों की पुतली

अपने कलेजे का टुकड़ा

और ढेर सारा दहेज भी 


कुछ उसी तरह जैसे

उस नव परिणिता ने कर दिया

तुम्हारे हवाले अपनी लाज

अपना प्रेम और अपनी निजता भी

यानि कि अपना सर्वस्व

उस रात जब तुम हुए थे 

अपनी दशकों की प्यास से तृप्त

उसे प्रेम की प्यास से अतृप्त छोड़कर


फिर धीरे धीरे तुम दिखाने लगे

अपना रूप अपनी तृष्णा अपनी हवस

और अपना असली रंग


तुमने कहाँ जलाया

सिर्फ़ माँगा थोड़े से रुपये

यही कोई पचीस तीस लाख

थोड़ा सा सामान जैसे ब्रांडेड टीवी

एसी, वाशिंग मशीन आदि  आदि

और  एक छोटी सी गाड़ी जैसे आउडी या फोरचूनर 


और  फरमाइशों के पूरी नहीं होने पर

उसके माँ बाप को गालियां देना

बात बात पर नाराज़ होना और

तुम्हें अर्पित देह की चमड़ी उधेड़ देना 

यह तो एक तरीका था तुम्हारे प्यार का

इसे जलाना नहीं कहते हैं


अब वो तिल तिल कर जले हर रोज

तो इसमें तुम्हारा क्या कुसूर?

हाँ तुमने नहीं जलाया.......

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