नाम से हम फ़क़ीर हैं समझे?
धनकुबेरों की पीर हैं समझे।।
हमपे लाखों का कर्ज़ है यारों
हम बहुत ही अमीर हैं समझे?
जितने बदहाल हैं भिखारी हैं
सब हमारे असीर हैं समझे?
अब है कानून अपनी मुट्ठी में
हर तरह हम क़दीर हैं समझे?
कौन सा दीन कौन सा मज़हब
हम तो ज़र के पज़ीर हैं समझे?
असीर/बंधक
क़दीर/समर्थ, नियंत्रण करने वाले
ज़र/ दौलत
पज़ीर/समर्थक, मानने वाले
सुरेश साहनी कानपुर
9451545132
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