हम अगर हम से मिल नहीं पाये।

तुम भी तो तुम से मिल नहीं पाए।।


लज़्ज़ते-ग़म है इश्क़ की ऐसी

हम किसी ग़म से मिल नहीं पाये।।


हम अना में पहुँच के बामे-अदम

यूँ गिरे धम से मिल नहीं पाये।।


आशना होके कब मिले तुम भी

हम भी हमदम से मिल नहीं पाये।।


ताब-ए-तिश्नगी रही इतनी

होठ शबनम से मिल नहीं पाये।।


इश्क़ की मय तलब में थी लेकिन

हुस्न के खम से मिल नहीं पाये।।


सुरेश साहनी कानपुर

9451545132

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