दरहक़ीक़त हमें पहचान रहे हो तो कहो।

इक ज़रा सा भी अगर जान रहे हो तो कहो।।


तुम कभी दिल मे रहे हो हमें मालूम नहीं

ख़्वाब में भी कभी मेहमान रहे हो तो कहो।।


आदमी होना बड़ी बात नहीं हम भी हैं

दिल से लेकिन कभी इन्सान रहे हो तो कहो।।


कल फरिश्ते थे मगर आज हैं इबलीश बहुत

अब मलायक कभी शैतान रहे हो तो कहो।।


दीन क्या है फ़क़त इन्सान की ख़िदमत करना

खूब जाने हो मगर मान रहे हो तो कहो।।


सुरेश साहनी, कानपुर

945154532

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