इश्क़ में आख़िर क्या बँटवारा होना है

जब उसका सारे का सारा होना है


क्या बालू क्या पत्थर क्या माटी देखें

सागर से मिलकर सब खारा होना है


इश्क़ समुन्दर अपनी ज़िद पर क़ायम है

हुस्न तुझे ही पारा पारा होना है


तय करनी है दूरी हिम से सागर की 

दर दर फिरना है बंजारा होना है


अपनी हस्ती होनी है उसकी हस्ती

प्यार कहाँ किस से दोबारा होना है


पाना है या चढ़ जाना है सूली पर

आज यहीं सब वारा न्यारा होना है


आज साहनी दिल से दिल का सौदा कर

इससे कम क्या खाक़ गुजारा होना है


सुरेश साहनी कानपुर

9451545132

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