इस दिले-बीमार से बाहर निकल।

स्वप्न के संसार से बाहर निकल।।


वो कहानी है अधूरी हर तरह

मर चुके  किरदार से बाहर निकल।।


जिसकी खबरों पर नहीं तुझको यक़ीन

अब तो उस अखबार से बाहर निकल।।


आस है साहिल की जर्जर किश्तियाँ

डूब कर मझधार से बाहर निकल।।


जो तुम्हारे धर्म के प्रतिकूल है

ऐसे हर व्यवहार से बाहर निकल ।।

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