मेरी ग़ज़लों में मानी ढूंढते हो।

कहाँ सहरा में पानी ढूंढते हो।।

मिटा कर दास्तां तुम ख़ुद गए थे

तो अब किसकी कहानी ढूंढते हो।।

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