उठती गिरती लहरों ने जब मझधारों का दामन छोड़ा।
 तट पर जैसे उम्मीदों  ने टकराकर अपना दम तोड़ा।।

Comments

Popular posts from this blog

भोजपुरी लोकगीत --गायक-मुहम्मद खलील