मैं  लड़खड़ा भी जाऊँ तो बेशक़ सम्हाल मत।

लेकिन मेरे वक़ार की पगड़ी उछाल मत।।


इतना ही दरियादिल है तो खुल के जकात कर

बढ़ चढ़ के नेकियां तो कर दरिया में डाल मत।।

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