मिल रही है जो आशीष ले लीजिये।

अपने गुरुओं की बख्शीश ले लीजिये।।

अब के आयोजकों का भरोसा नहीं

मंच से पेशतर फीस ले लीजिये।।साहनी

Comments

Popular posts from this blog

भोजपुरी लोकगीत --गायक-मुहम्मद खलील