ख़्वाब में उनके नज़र आने की सूरत बनती।

तब कहीं दिल के सनमखाने की सूरत बनती।।


काश सूरत में भी होती कोई वाज़िब सूरत 

मेरे शायर के जो फिर आने की सूरत बनती।।साहनी

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