शेर क्या घायल हुआ अब गीदड़ों की मौज है।

आजकल वैसे भी अवसरवादियों की मौज है।।

एक अच्छे सेठ के मरने पे कितने हैं दुखी

पर उन्ही के घर वसीयत धारियों की मौज है।।

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