मेरी कविता उलझना चाहती हैं

मुहब्बत की कंटीली झाड़ियों में

मगर फतवे फंसा लेते हैं इनको

तरद्दुद की नुकीली दाढ़ियों में।।सुरेशसाहनी

फतवा- धर्म आदेश

तरद्दुद- झंझट

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