ज़हां भर को मगन रखते रहे हो।

सनम कितने नयन रखते रहे हो।।

हृदय-पाषाण में सम्भव नहीं है

कहाँ फिर अश्रु-घन  रखते रहे हो।।साहनी

Comments

Popular posts from this blog

भोजपुरी लोकगीत --गायक-मुहम्मद खलील