तुम्हे हमने हमारा सब दिया है।
मगर तुमने तवज्जो कब दिया है।।
हमारी आदमीयत छीन ली है
बदलकर इक अदद मजहब दिया है।।
सलीका भी अता कर उसको मौला
जिसे मीना-ओ-सागर सब दिया है।।
मेरी जीने की हसरत मर चुकी है
मुझे ऐवान बे मतलब दिया है।।
उसे दिल किसलिए छोटा दिया है
जिसे इतना बड़ा मनसब दिया है।।
हमारे प्यार के बदले में तुमने
हमे धोखा दिया है जब दिया है।।

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