माँ तुझ पर क्या लिख सकता हूँ।
मैं तो खुद तेरी रचना हूँ।।
तूने खुद को घटा दिया है
तब जाकर मैं बड़ा हुआ हूँ।।
आज थाम लो मेरी ऊँगली
माँ मैं सचमुच भटक गया हूँ।।
मुझसे गलती कभी न होगी
आखिर तेरा ही जाया हूँ।।
तेरी सेवा कर न सका मैं
यही सोच रोया करता हूँ।।
कैसे कर्ज चुकाऊँ तेरे
क्या मैं कर्ज चुका सकता हूँ।।
तेरी दुआ बचा लेती है
जब मैं मुश्किल में होता हूँ।।

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