‪#‎अक्षयसिंहकोश्रद्धांजलि‬ ‪#‎अबतकसैंतालिस‬

आखिर कब तक अंधकार का शासन होगा
आखिर कबतक दीप आश के बुझे रहेंगे
आखिर कब तक हम तम को चुपचाप सहेंगे
आखिर कब तक यह सुन कर ताली पीटेंगे
‪#‎हम‬ ने ये माना अँधियारा बहुत घना है
दिया जलाना कहाँ मना है???
दिया जलाना कहाँ मना है???
पंथ और मजहब आखिर कब तक बाटेंगे
जात पाँत के नाम वोट कब तक बाटेंगे
मानवता को दानवता की भेंट चढ़ाकर
रोटी के मजहब को हम कब पहचानेंगे
चलो मशालें लेकर चलना जहाँ मना है
चलो अँधेरा जहाँ घना है!!!
चलो अँधेरा जहाँ घना है!!!!!!

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