सफर सफर गुजर रहे है हम। दर नहीं दर-ब-दर रहे हैं हम।।


सफर सफर गुजर रहे है हम।
दर नहीं दर-ब-दर रहे हैं हम।।

कोई नजरें मिला के कह देता
उसके दिल में उतर रहे हैं हम।।

उनकी तारीफ़ दूसरा न करे
इतने फितना जिगर रहे हैं हम।।

उसकी नजरों में कोई जादू है
कतरा कतरा संवर रहे हैं हम।।

सिर्फ अपने लिए ही क्या जीना
कोई एहसान कर रहे हैं हम।।

इतनी वहशत हमारी आँखों में
क्या कभी जानवर रहे हैं हम।।

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